यथार्थवाद (Yatharthavad) एक दार्शनिक और साहित्यिक सिद्धांत है जो वास्तविकता और सत्यता पर जोर देता है। इसका अर्थ है "वास्तविकता का सिद्धांत" और यह मानव अनुभवों और जीवन के यथार्थ को परिभाषित करता है। यथार्थवाद में, चीजों को उनके वास्तविक रूप में समझने और प्रस्तुत करने की कोशिश की जाती है, बिना किसी अतिशयोक्ति या कल्पना के। यह साहित्य, कला और सामाजिक विचारधाराओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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